📰 बांग्लादेश में तुर्की समर्थित समूह द्वारा ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ मानचित्र का प्रचार: भारत की संप्रभुता पर नया संकट

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में तुर्की समर्थित इस्लामी समूह ‘सल्तनत-ए-बंगला’ द्वारा एक विवादास्पद ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ मानचित्र का प्रचार किया गया है, जिसमें भारत के बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ म्यांमार के अराकान राज्य को भी शामिल किया गया है। @EconomicTimes

यह मानचित्र ढाका के विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच प्रचारित किया गया है, जिससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर गंभीर सवाल उठे हैं।


🔍 तुर्की का बढ़ता प्रभाव और रणनीतिक महत्वाकांक्षा

तुर्की ने बांग्लादेश में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए सैन्य आपूर्ति और एनजीओ गतिविधियों के माध्यम से सक्रियता दिखाई है। ‘सल्तनत-ए-बंगला’ जैसे समूहों के माध्यम से तुर्की, पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों की तरह बांग्लादेश में भी रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।


🛡️ भारत की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव

भारत ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है और इसे अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता पर सीधा हमला माना है। इस तरह के प्रचार से भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


📌 निष्कर्ष

‘ग्रेटर बांग्लादेश’ मानचित्र का प्रचार न केवल भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाता है, बल्कि दक्षिण एशिया में तुर्की की बढ़ती रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी उजागर करता है। भारत को इस चुनौती का सामना करने के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर सक्रियता दिखानी होगी।

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