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📰 भारत में तुर्की और अज़रबैजान का बहिष्कार: पाकिस्तान समर्थन के बाद भारी संख्या में यात्रा रद्द

📰 भारत में तुर्की और अज़रबैजान का बहिष्कार: पाकिस्तान समर्थन के बाद भारी संख्या में यात्रा रद्द

📍 2024 में रिकॉर्ड खर्च, 2025 में जबरदस्त गिरावट

2024 में भारतीय पर्यटकों ने तुर्की और अज़रबैजान में $400 मिलियन (लगभग ₹3,300 करोड़) से अधिक खर्च किया। लेकिन अप्रैल 2025 के पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले (पाहलगाम) के बाद, भारत द्वारा “Operation Sindoor” के तहत की गई जवाबी कार्रवाई और तुर्की-अज़रबैजान के पाकिस्तान समर्थक बयानों के चलते, अब इन दोनों देशों की यात्रा बुकिंग तेजी से रद्द हो रही हैं।


 भारत में बढ़ रहा गुस्सा

🔥 हर्ष गोयनका ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

RPG ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने ट्वीट करते हुए लिखा:

“भारतीयों ने पिछले साल तुर्की और अज़रबैजान में ₹4,000 करोड़ खर्च किए और आज वे पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। कृपया इन जगहों की यात्रा बंद करें।”

यह ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कई सेलिब्रिटी, उद्योगपति और आम लोग इस बहिष्कार का समर्थन करते नजर आए।


🧾 ट्रैवल एजेंसियों के आंकड़े

📉 MakeMyTrip और Ixigo के अनुसार:

  • तुर्की-अज़रबैजान के लिए बुकिंग में 60% की गिरावट

  • रद्दीकरण में 250% की वृद्धि

  • उत्तर भारत (UP, Delhi-NCR, Punjab) से सबसे ज्यादा रद्द बुकिंग्स

✈️ Ixigo के सह-संस्थापक अलोक बजपाई ने कहा:

“अब खून और बुकिंग्स एक साथ नहीं बह सकते। हमने तुर्की, अज़रबैजान और चीन के लिए सभी बुकिंग्स रद्द कर दी हैं।”


🌍 वैकल्पिक गंतव्यों की ओर रुझान

तुर्की और अज़रबैजान की जगह अब भारतीय पर्यटक इन गंतव्यों की ओर बढ़ रहे हैं:

देश कारण
वियतनाम सस्ता, वीज़ा आसान, खूबसूरत बीच
रूस बिना वीज़ा डेस्टिनेशन, सांस्कृतिक विविधता
UAE / दुबई भारत के करीब, लग्ज़री और शॉपिंग स्वर्ग

📽️ बॉलीवुड और पर्यटन उद्योग का रुख

FWICE और AICWA जैसे फिल्म संगठनों ने भी तुर्की में शूटिंग रोकने की मांग की है। इससे यह स्पष्ट है कि अब पर्यटन और मनोरंजन दोनों क्षेत्रों में तुर्की और अज़रबैजान को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।


❗ निष्कर्ष

तुर्की और अज़रबैजान की ओर से पाकिस्तान को समर्थन मिलने के बाद भारत में एक भावनात्मक और आर्थिक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। इससे न सिर्फ इन देशों को पर्यटन से करोड़ों का नुकसान होगा, बल्कि यह भविष्य में ऐसे मामलों में सरकारों को सोचने पर मजबूर करेगा कि भारत जैसे विशाल बाज़ार की उपेक्षा करने की कीमत क्या हो सकती है।

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