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बुज़ुर्ग भी कर सकते हैं अंगदान, जानें बढ़ती उम्र में ऑर्गन डोनेशन की सच्चाई

बुज़ुर्ग भी कर सकते हैं अंगदान, जानिए बढ़ती उम्र में ऑर्गन डोनेशन की सच्चाई

भारत में अंगदान (Organ Donation) को लेकर कई भ्रांतियाँ हैं, जिनमें से एक आम धारणा यह है कि बुज़ुर्ग लोग अंगदान नहीं कर सकते। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। अंगदान की प्रक्रिया में उम्र कोई बाधा नहीं है, बल्कि अंगों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य स्थिति अधिक महत्वपूर्ण होती है।

👵 क्या 60+ उम्र में अंगदान संभव है?

जी हाँ, 60 या उससे अधिक उम्र के लोग भी अंगदान कर सकते हैं। कई मामलों में 80 वर्ष तक के लोग भी सफलतापूर्वक अंगदान कर चुके हैं। अंगों की क्वालिटी और काम करने की क्षमता ही प्राथमिकता होती है, न कि उम्र।

🧠 कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?

बुज़ुर्गों द्वारा निम्न अंग और टिशू दान किए जा सकते हैं:

🩺 किन अंगों के लिए आयु सीमा होती है?

कुछ अंगों जैसे हृदय और फेफड़े के लिए आयु की सीमा अधिक सख्त होती है। 55 से 60 वर्ष के बाद इन अंगों का ट्रांसप्लांट जोखिमभरा हो सकता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह भी संभव होता है।

🧾 क्या है कानूनी प्रक्रिया?

भारत में The Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 1994 के तहत अंगदान किया जाता है। उम्र के आधार पर कोई सीधी पाबंदी नहीं है, लेकिन डॉक्टर अंग की स्थिति का आकलन कर निर्णय लेते हैं।

❌ आम भ्रांतियाँ और उनका सच

भ्रांति सच्चाई
“बुज़ुर्गों के अंग बेकार होते हैं” नहीं, सही देखभाल और स्वास्थ्य के साथ अंग ट्रांसप्लांट के लिए योग्य हो सकते हैं।
“बीमारियों के बाद अंगदान संभव नहीं” यह अंग विशेष और बीमारी की स्थिति पर निर्भर करता है। डॉक्टर अंतिम निर्णय लेते हैं।
“मृत्यु के बाद अंगदान नहीं होता” ब्रेन डेड व्यक्ति के अंग ट्रांसप्लांट योग्य हो सकते हैं।

🌿 समाज में सकारात्मक बदलाव की ज़रूरत

भारत में अंगदान की दर बहुत कम है। यदि बुज़ुर्ग आगे आकर अंगदान की पहल करें, तो हजारों लोगों को नया जीवन मिल सकता है। इससे समाज में जागरूकता बढ़ेगी और युवा पीढ़ी भी प्रेरित होगी।

📌 निष्कर्ष

बुज़ुर्गों द्वारा अंगदान न केवल संभव है, बल्कि जीवनदायी भी है। उम्र कोई रुकावट नहीं, बल्कि अनुभव और सेवा भावना का प्रतीक है। यदि स्वास्थ्य सही है और डॉक्टर अनुमति देते हैं, तो आप किसी ज़रूरतमंद को ज़िंदगी का तोहफा दे सकते हैं।

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