⚠️ किशोरों में बढ़ती खतरनाक आदत: भोजन छोड़ना और अनियमित खानपान

आज के तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धी माहौल में किशोरों (Teenagers) की जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है। स्कूल, कोचिंग, सोशल मीडिया और मनोरंजन के बीच उनका खानपान सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। हाल ही में चंडीगढ़ में एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह बात उजागर हुई है कि किशोरों में भोजन छोड़ने (Skipping Meals) और अनियमित खाने (Irregular Eating Patterns) की आदतें तेजी से बढ़ रही हैं, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।


📉 अनियमित खानपान से क्या होते हैं नुकसान?

1. ⚡ ऊर्जा की कमी और थकावट:

भोजन न करने से शरीर को जरूरी कैलोरी और पोषण नहीं मिलता, जिससे मानसिक और शारीरिक थकान होती है।

2. 🧠 फोकस और याददाश्त में कमी:

स्कूल और पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे शैक्षणिक प्रदर्शन पर असर पड़ता है।

3. 🍔 जंक फूड की लत:

भूख लगने पर तुरंत उपलब्ध स्नैक्स या फास्ट फूड की आदत लग जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

4. 🩸 एनीमिया और पोषण की कमी:

खासकर लड़कियों में आयरन, कैल्शियम और विटामिन की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और मासिक धर्म अनियमित हो सकता है।

5. ⚖️ वजन से जुड़ी समस्याएं:

कुछ किशोर जानबूझकर वजन घटाने के लिए खाना छोड़ते हैं, जिससे ईटिंग डिसऑर्डर जैसे एनोरेक्सिया या बुलीमिया हो सकते हैं।


🧬 रिपोर्ट में क्या सामने आया?

Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, चंडीगढ़ के स्कूलों में किए गए एक सर्वे में सामने आया कि

  • 40% किशोर नियमित नाश्ता नहीं करते

  • कई बच्चे दिन में सिर्फ एक बार खाना खाते हैं

  • फिजिकल एक्टिविटी के साथ पोषण में असंतुलन गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है


📲 इसके पीछे के प्रमुख कारण:

  • मोबाइल और गैजेट्स में व्यस्त रहना

  • देर रात जागना और देर से उठना

  • फैशन या फिटनेस के नाम पर डायटिंग

  • समय की कमी और पैरेंटल निगरानी की कमी

  • खाने के प्रति अरुचि और फूड डिसऑर्डर


🛡️ बचाव और सुधार के उपाय:

1. नियमित समय पर भोजन करें:

हर 3–4 घंटे में संतुलित आहार लें। मुख्य भोजन छोड़ने की बजाय हल्के हेल्दी स्नैक्स लें।

2. नाश्ते को न करें नजरअंदाज:

नाश्ता पूरे दिन की ऊर्जा का स्रोत है। इसमें अंडा, फल, दूध, ब्रेड जैसे पोषक तत्व शामिल करें।

3. स्क्रीन टाइम करें नियंत्रित:

मोबाइल पर गेम या वीडियो की बजाय खाने के समय ध्यान केवल भोजन पर दें।

4. पैरेंट्स का रोल महत्वपूर्ण:

माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के खाने की आदतों पर ध्यान दें और एक उदाहरण बनें।

5. पोषण विशेषज्ञ से परामर्श:

अगर बच्चा भोजन छोड़ रहा है या वजन को लेकर चिंतित है, तो डाइटीशियन की मदद लें।


🧠 समझें, खानपान से जुड़ी आदतें किशोरावस्था में ही बनती हैं

इस उम्र में ही शरीर, दिमाग और भावनाएं तेजी से विकसित होती हैं। ऐसे में संतुलित और नियमित भोजन ही उनके भविष्य को बेहतर बना सकता है। भोजन छोड़ना स्टाइल नहीं, बल्कि सेहत के लिए रिस्क है।


🔚 निष्कर्ष:

किशोरों में अनियमित खानपान की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। इसके दुष्परिणाम सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर भी असर डालते हैं। समय रहते इस आदत को सुधारा गया तो न केवल बच्चों की सेहत बेहतर होगी बल्कि उनका आत्मविश्वास और प्रदर्शन भी। याद रखें — “खाना मत छोड़ो, खुद को स्वस्थ और मजबूत बनाओ।”

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