राष्ट्रपति संदर्भ: संविधान का मौलिक कानूनी प्रावधान
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी महत्वपूर्ण कानूनी या संवैधानिक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकते हैं। इसे “राष्ट्रपति संदर्भ” (Presidential Reference) कहा जाता है।
राष्ट्रपति संदर्भ की प्रक्रिया क्या होती है?
जब केंद्र सरकार को कोई ऐसा संवैधानिक या कानूनी प्रश्न उत्पन्न होता है जो राष्ट्रीय हित से जुड़ा हो और उसका निपटारा न्यायिक मार्ग से आवश्यक हो, तब राष्ट्रपति इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह लेने का निर्णय ले सकते हैं।
इस प्रक्रिया की मुख्य बातें:
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राष्ट्रपति अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट से परामर्श मांगते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट उस प्रश्न पर विचार कर अपना “विचारात्मक उत्तर” देता है।
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यह राय बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका नैतिक और कानूनी महत्व अत्यधिक होता है।
राष्ट्रपति संदर्भ के प्रकार
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अनुच्छेद 143(1) – इसमें राष्ट्रपति ऐसे प्रश्नों पर सुप्रीम कोर्ट से राय मांग सकते हैं जो कानून या संविधान की व्याख्या से संबंधित हों।
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अनुच्छेद 143(2) – इसमें राष्ट्रपति उन विवादों को सुप्रीम कोर्ट भेज सकते हैं जो केंद्र और राज्यों के बीच उत्पन्न हुए हों।
ऐतिहासिक उदाहरण
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केशवानंद भारती केस के बाद – संविधान संशोधन की सीमाओं को लेकर स्पष्टता के लिए राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी थी।
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राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद – 1993 में उत्तर प्रदेश सरकार की भूमि अधिग्रहण की वैधता को लेकर राष्ट्रपति ने संदर्भ भेजा था।
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नवीनतम संदर्भ (2024-2025) – हाल ही में दिल्ली में उपराज्यपाल बनाम मुख्यमंत्री विवाद और चुनाव आयोग की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट से राय मांगी गई है।
यह क्यों जरूरी है?
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संवैधानिक अस्पष्टताओं को सुलझाने के लिए
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कार्यपालिका को न्यायिक मार्गदर्शन देने के लिए
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जटिल विधायी मुद्दों पर स्पष्टता के लिए
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संघीय ढांचे की स्थिरता बनाए रखने के लिए
निष्कर्ष
राष्ट्रपति संदर्भ भारत के लोकतंत्र और संविधान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह न केवल कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संवाद स्थापित करता है, बल्कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा में भी सहायक होता है। अनुच्छेद 143 के तहत प्राप्त यह अधिकार, भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की एक सशक्त विशेषता है।

