🇮🇳 भारत में राष्ट्रपति शासन कैसे लगाया जाता है? जानिए पूरी प्रक्रिया
भारत एक संघीय गणराज्य है जिसमें राज्यों को स्वायत्तता दी गई है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार को यह अधिकार होता है कि वह किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) लागू कर सके। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत संभव है।
🧾 राष्ट्रपति शासन कब लगाया जाता है?
जब किसी राज्य में यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है कि वहां की सरकार संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर पा रही है, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को इसकी रिपोर्ट भेजता है। इसके आधार पर राष्ट्रपति उस राज्य की सरकार को बर्खास्त कर सकते हैं और राज्य की सत्ता सीधे केंद्र सरकार के अधीन आ जाती है।
⚖️ संविधान में क्या प्रावधान है?
अनुच्छेद 356 के अंतर्गत:
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राष्ट्रपति राज्य की कार्यपालिका और विधायिका के कार्य अपने अधीन ले सकते हैं।
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राज्य विधानसभा को निलंबित या भंग किया जा सकता है।
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यह घोषणा संसद की दोनों सदनों से 2 माह के भीतर पारित होनी चाहिए।
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एक बार स्वीकृति मिलने पर राष्ट्रपति शासन 6 माह तक लागू रह सकता है।
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अधिकतम 3 वर्षों तक इसे बढ़ाया जा सकता है, लेकिन 1 वर्ष के बाद विस्तार के लिए निम्न दो शर्तें आवश्यक हैं:
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राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो।
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चुनाव आयोग यह प्रमाणित करे कि राज्य में चुनाव कराना संभव नहीं है।
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🚨 किन कारणों से राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है?
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विधानसभा में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलना
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गठबंधन सरकार का टूट जाना
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मुख्यमंत्री का बहुमत खो देना
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प्राकृतिक आपदा या कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ना
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संवैधानिक तंत्र का पूर्ण विफल हो जाना
⚖️ न्यायिक निगरानी और S.R. बोम्मई केस
1994 में आए S.R. Bommai बनाम भारत सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 356 का उपयोग मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता। अगर राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, तो उसकी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। इसके अलावा, बहुमत का परीक्षण विधानसभा के फ्लोर पर ही किया जाना चाहिए।
🗂️ कुछ चर्चित उदाहरण
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पंजाब (1983): आतंकवादी घटनाओं के बाद सरकार बर्खास्त
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उत्तराखंड (2016): राजनीतिक संकट और बगावत के चलते राष्ट्रपति शासन
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जम्मू-कश्मीर (2018): गठबंधन टूटने के बाद राष्ट्रपति शासन, बाद में राज्य पुनर्गठन
🔚 निष्कर्ष
राष्ट्रपति शासन एक संवैधानिक प्रावधान है जो किसी राज्य में संकट की स्थिति में केंद्र सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार देता है। हालांकि, इसके दुरुपयोग की संभावना को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त दिशानिर्देश तय किए हैं।

