📰 शशि थरूर की स्वतंत्र पहल से कांग्रेस में आंतरिक विवाद, केंद्र के साथ टकराव तेज
🇮🇳 क्या है पूरा मामला?
भारत सरकार ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत एक ऑल पार्टी डेलीगेशन को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष रखने के लिए भेजने की योजना बनाई। इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के सांसद शशि थरूर को भी शामिल किया गया। हालांकि कांग्रेस ने आपत्ति जताई, क्योंकि पार्टी की ओर से सुझाए गए चार नामों में थरूर का नाम नहीं था।
💥 कांग्रेस की नाराज़गी क्यों?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस फैसले को लेकर केंद्र पर “अनैतिक व्यवहार” का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने बिना पार्टी से चर्चा किए अपना नाम जोड़ दिया। कांग्रेस का कहना है कि एकजुटता बनाए रखने के लिए केंद्रीय स्तर पर स्पष्ट संवाद जरूरी था।
🧍♂️ थरूर की प्रतिक्रिया
शशि थरूर ने केंद्र की ओर से निमंत्रण स्वीकार किया और सार्वजनिक रूप से बयान दिया कि वह जब देश की सेवा की बात हो, पीछे नहीं हटेंगे। इससे यह सवाल उठा कि क्या यह कदम थरूर की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा या राष्ट्रीय हित में था।
🏛️ राजनीतिक संकेत
यह विवाद केवल एक प्रतिनिधिमंडल में नाम जोड़ने भर का नहीं है—यह विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच विश्वास के संकट का संकेत देता है। साथ ही यह कांग्रेस के अंदर चल रहे संघर्ष और अनुशासन की समस्याओं को भी उजागर करता है।
🔍 निष्कर्ष
शशि थरूर की यह ‘एकल पहल’ कांग्रेस और केंद्र के बीच संबंधों में नई खाई पैदा कर गई है। यह प्रकरण बताता है कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद की कमी किस तरह राष्ट्रीय नीतियों को प्रभावित कर सकती है।

