📰 शिखा गुप्ता ने सेबी के कार्यकारी निदेशक पद को ठुकराया

शिखा गुप्ता, जिन्हें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के कार्यकारी निदेशक पद के लिए मंजूरी मिली थी, ने अब इस पद को नहीं लेने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उस समय आया है जब सेबी में नेतृत्व परिवर्तन हो रहा है, और इससे नियामक संस्था की नियुक्ति प्रक्रिया में नया मोड़ आया है।


🔍 नियुक्ति प्रक्रिया और विवाद

गुप्ता की नियुक्ति सेबी की पूर्व चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच के कार्यकाल के दौरान हुई थी। हालांकि, उनकी नियुक्ति पर विवाद तब उत्पन्न हुआ जब यह सामने आया कि गुप्ता हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) में टैक्स डायरेक्टर थीं, जहां बुच के पति धवल बुच एक वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा, गुप्ता की पूंजी बाजार नीति में विशेषज्ञता की कमी पर भी सवाल उठे थे।


🏛️ सेबी में नेतृत्व परिवर्तन

माधबी पुरी बुच ने फरवरी 2025 में सेबी के चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दिया, और उनके स्थान पर 1 मार्च 2025 को वरिष्ठ नौकरशाह तुहिन कांत पांडे ने पदभार संभाला। इस नेतृत्व परिवर्तन के बीच गुप्ता का पद ठुकराना सेबी के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है।


🔄 आगे की राह

सेबी अब कार्यकारी निदेशक पद के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करेगा। यह घटना सेबी की नियुक्ति प्रक्रियाओं और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है, और भविष्य में ऐसी नियुक्तियों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है।


📌 निष्कर्ष

शिखा गुप्ता का सेबी के कार्यकारी निदेशक पद को ठुकराना एक असामान्य घटना है, जो नियामक संस्था की नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता को उजागर करती है। सेबी को अब इस पद के लिए नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जो संस्था के भविष्य के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होगी।

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