ट्रंप के कारण भारतीय बाज़ार की ओर झुकाव बढ़ा रहे हैं चीनी कंपनियां
नई दिल्ली।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार समीकरणों में बड़ा बदलाव ला दिया है। इसका सीधा असर अब भारत और चीन के कारोबारी रिश्तों पर दिखने लगा है। अमेरिकी बाज़ार में अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ने के खतरे के चलते अब चीनी कंपनियां भारतीय बाज़ार में गहरी पैठ बनाने के लिए पहले से ज्यादा तैयार दिख रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) चीन की प्रतिष्ठित इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी हायर इंडिया (Haier India) में बड़ी हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में सबसे आगे है। हायर अपने भारतीय परिचालन में 25-51% हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है, ताकि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिल सके। इस रणनीति के तहत एक भारतीय कंपनी सबसे बड़ी शेयरधारक बनेगी, जैसा कि एमजी मोटर्स ने अपने भारतीय व्यवसाय में किया था।
भारतीय शर्तों के लिए बढ़ती सहमति
2020 में भारत-चीन सीमा तनाव के बाद से भारत सरकार ने चीनी निवेश पर सख्ती बढ़ा दी थी। लेकिन अब बदलते वैश्विक हालात के चलते शंघाई हाईली ग्रुप (Shanghai Highly Group) और हायर जैसी चीनी कंपनियां भारतीय शर्तों के अनुसार काम करने को तैयार हो गई हैं। कंपनियां अब अपने प्रस्तावित संयुक्त उपक्रमों में केवल अल्पांश (minority stake) रखने पर भी सहमत हो रही हैं — जो पहले अस्वीकार्य था।
टाटा ग्रुप के साथ नई पहल
सूत्रों के मुताबिक, शंघाई हाईली ग्रुप ने एक बार फिर टाटा ग्रुप के वोल्टास (Voltas) के साथ संयुक्त उद्यम की बातचीत शुरू की है। दिलचस्प बात यह है कि अब चीनी कंपनी केवल छोटी हिस्सेदारी पर राजी हो गई है। भारतीय सरकार भी इस दिशा में कदम उठा सकती है कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में चीन की इक्विटी भागीदारी को 10% तक सीमित कर दिया जाए।
भारत: नया रणनीतिक गढ़
ट्रंप सरकार की नीतियों से अमेरिकी बाज़ार में अनिश्चितता बढ़ने के कारण, चीन की दिग्गज कंपनियां अब भारत को एक स्थायी और बड़े उपभोक्ता बाज़ार के रूप में देख रही हैं। भारतीय साझेदारों के साथ हाथ मिलाकर वे न सिर्फ अपनी उपस्थिति बनाए रखना चाहती हैं, बल्कि स्थानीय विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के जरिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी बने रहना चाहती हैं।

